निकाह के बाद पति-पत्नी का साथ रहना इस्लाम में एक पाक और जायज़ रिश्ता है। इस्लाम ने जीवन के दूसरे कामों की तरह हमबिस्तरी से पहले भी अल्लाह को याद करने और दुआ पढ़ने की शिक्षा दी है। बहुत से लोग humbistari se pehle aulad ki dua, दुआ पढ़ने का सही तरीका और नेक औलाद के लिए पढ़ी जाने वाली दुआ जानना चाहते हैं।
हमबिस्तरी से पहले पढ़ी जाने वाली दुआ का मकसद केवल औलाद माँगना नहीं, बल्कि पति-पत्नी और होने वाली औलाद को शैतान के बुरे असर से बचाने के लिए अल्लाह से मदद माँगना है। इस लेख में हम humbistari se pehle ki dua in Hindi, English और Arabic के साथ इसका आसान मतलब जानेंगे।
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Humbistari Se Pehle Ki Dua
पति-पत्नी को हमबिस्तरी शुरू करने से पहले “बिस्मिल्लाह” के साथ यह दुआ पढ़नी चाहिए:
अरबी में दुआ
بِسْمِ اللَّهِ، اللَّهُمَّ جَنِّبْنَا الشَّيْطَانَ، وَجَنِّبِ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا
Humbistari Se Pehle Ki Dua in Hindi
बिस्मिल्लाहि, अल्लाहुम्मा जन्निबनश्-शैताना व जन्निबिश्-शैताना मा रज़क़्तना।
दुआ का हिंदी मतलब
“अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ। ऐ अल्लाह! हमें शैतान से दूर रख और जो औलाद तू हमें दे, उसे भी शैतान से दूर रख।”
Humbistari Se Pehle Ki Dua in English
Bismillah, Allahumma jannibnash-shaitana wa jannibish-shaitana ma razaqtana.
English Meaning: In the name of Allah. O Allah, keep Satan away from us and keep Satan away from whatever You bless us with.
यह दुआ सहीह हदीस में बताई गई है। नबी करीम ﷺ ने फरमाया कि अगर इस संबंध से उनके नसीब में बच्चा लिखा गया हो, तो शैतान उसे नुकसान नहीं पहुँचा सकेगा। यह रिवायत सहीह अल-बुखारी 6388 में मौजूद है। हदीस देखें
Humbistari Se Pehle Padhne Ki Dua कब पढ़ें?
यह दुआ पति या पत्नी में से कोई भी पढ़ सकता है, लेकिन आमतौर पर पति इसे पढ़ता है। इसे हमबिस्तरी शुरू करने से ठीक पहले पढ़ना चाहिए। दुआ बहुत छोटी है, इसलिए इसे आसानी से याद किया जा सकता है।
यदि किसी को अरबी सही तरह पढ़ना नहीं आता, तो वह शुरुआत में हिंदी transliteration देखकर दुआ याद कर सकता है। अरबी शब्दों का सही उच्चारण सीखने के लिए किसी जानकार आलिम या कारी से सहायता लेना बेहतर रहेगा।
अगर कोई व्यक्ति दुआ पढ़ना भूल जाए, तो उसे परेशान या निराश नहीं होना चाहिए। आगे से इसे याद रखने की कोशिश करे और अल्लाह से अपनी तथा अपनी औलाद की हिफाज़त की दुआ माँगे।
क्या यह औलाद होने की खास दुआ है?
लोग इसे आमतौर पर humbistari se pehle aulad ki dua कहते हैं, लेकिन इसका सही अर्थ समझना जरूरी है। इस दुआ में सीधे तौर पर औलाद माँगने के बजाय शैतान से सुरक्षा माँगी जाती है। हदीस में बताया गया है कि अगर उस संबंध से औलाद का पैदा होना अल्लाह ने तय किया होगा, तो यह दुआ उस बच्चे की सुरक्षा का कारण बनेगी।
इसलिए यह समझना सही नहीं होगा कि दुआ पढ़ते ही औलाद मिलना निश्चित हो जाता है। औलाद देना केवल अल्लाह के अधिकार में है। इंसान को दुआ के साथ अल्लाह पर भरोसा रखना और जरूरत होने पर सही चिकित्सकीय सलाह भी लेनी चाहिए।
नेक औलाद के लिए कुरआन की दुआ
जो पति-पत्नी नेक और अच्छी औलाद चाहते हैं, वे हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम की यह दुआ भी पढ़ सकते हैं:
رَبِّ هَبْ لِي مِن لَّدُنْكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً إِنَّكَ سَمِيعُ الدُّعَاءِ
हिंदी उच्चारण:
रब्बि हब ली मिल्लदुन्का ज़ुर्रिय्यतन तय्यिबतन, इन्नका समीउद्दुआ।
मतलब: “ऐ मेरे रब! मुझे अपनी तरफ से नेक औलाद प्रदान कर। बेशक तू दुआ सुनने वाला है।”
यह दुआ कुरआन की सूरह आले-इमरान, आयत 38 में मौजूद है। आयत देखें
पति-पत्नी सूरह अल-फुरकान की आयत 74 की दुआ भी पढ़ सकते हैं:
رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
हिंदी उच्चारण:
रब्बना हब लना मिन अज़वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना कुर्रता अयुनिं वजअलना लिल-मुत्तकीना इमामा।
मतलब: “ऐ हमारे रब! हमें हमारी पत्नियों और हमारी औलाद की तरफ से आँखों की ठंडक प्रदान कर और हमें परहेज़गार लोगों का आदर्श बना।” आयत देखें
Humbistari Se Pehle Kya Karna Chahiye?
Humbistari se pehle kya karna chahiye, इस सवाल का जवाब केवल दुआ तक सीमित नहीं है। पति-पत्नी को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- दोनों की रज़ामंदी और सहजता का ध्यान रखें।
- सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता का ख्याल रखें।
- एक-दूसरे के साथ प्यार और सम्मान से पेश आएँ।
- शुरुआत से पहले बताई गई दुआ पढ़ें।
- अपनी निजी बातों को दूसरों के सामने जाहिर न करें।
- मासिक धर्म के दौरान शारीरिक संबंध बनाने से बचें।
- ऐसा कोई तरीका न अपनाएँ जो इस्लाम में मना हो या किसी को नुकसान पहुँचाए।
पति-पत्नी का रिश्ता केवल शारीरिक नहीं होता। इसमें भरोसा, सम्मान, नर्मी और एक-दूसरे की भावनाओं का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है।
Humbistari Se Pehle Kya Khana Chahiye?
इस्लाम में humbistari se pehle kya khana chahiye के लिए कोई खास भोजन अनिवार्य नहीं किया गया है। ऐसा कोई प्रमाणित खाना नहीं है जिसे खाने से औलाद होने की गारंटी मिलती हो।
पति-पत्नी सामान्य रूप से हलाल, साफ और पौष्टिक भोजन ले सकते हैं। बहुत भारी, ज्यादा तला हुआ या ऐसा खाना जिससे शरीर में बेचैनी हो, उससे बचना बेहतर हो सकता है। स्वस्थ शरीर के लिए फल, सब्जियाँ, दालें, दूध, अंडे, मेवे और पर्याप्त पानी उपयोगी हो सकते हैं। यदि गर्भधारण में परेशानी हो रही हो, तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय योग्य डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
क्या Humbistari Se Pehle Namaz पढ़ना जरूरी है?
बहुत से लोग humbistari se pehle namaz के बारे में भी पूछते हैं। हर बार हमबिस्तरी से पहले कोई विशेष नमाज़ पढ़ना अनिवार्य नहीं है। इसलिए इसे जरूरी या फर्ज़ समझना सही नहीं होगा। पति-पत्नी सामान्य नफ्ल नमाज़ पढ़कर नेक औलाद और अपने रिश्ते में बरकत की दुआ कर सकते हैं, लेकिन मुख्य सुन्नत हमबिस्तरी से पहले बताई गई दुआ पढ़ना है।
हमबिस्तरी के बाद नमाज़ पढ़ने के लिए गुस्ल करना जरूरी होता है। यदि तुरंत सोना हो, तो गुप्त अंगों को धोकर वुज़ू करना बेहतर है, लेकिन अगली नमाज़ से पहले गुस्ल अवश्य करना होगा।
Sehri Se Pehle Humbistari करना कैसा है?
रमज़ान में sehri se pehle humbistari करना जायज़ है, बशर्ते यह फज्र का समय शुरू होने से पहले हो। पति-पत्नी को समय का ध्यान रखना चाहिए और फज्र की नमाज़ के लिए गुस्ल करना होगा। अगर फज्र का समय हो जाए और गुस्ल बाकी हो, तो रोज़ा हो सकता है, लेकिन नमाज़ के लिए जल्द गुस्ल करना जरूरी है। जानबूझकर फज्र के बाद हमबिस्तरी करने से रोज़ा टूट जाता है और इसके गंभीर धार्मिक नियम हो सकते हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में किसी भरोसेमंद आलिम से सही मसला पूछना चाहिए।
निष्कर्ष
Humbistari se pehle बिस्मिल्लाह के साथ सिखाई गई दुआ पढ़ना एक खूबसूरत सुन्नत है। इसमें पति-पत्नी अपने रिश्ते और मिलने वाली औलाद को शैतान से बचाने के लिए अल्लाह से मदद माँगते हैं। नेक औलाद के लिए कुरआन में बताई गई दुआएँ भी नियमित रूप से पढ़ी जा सकती हैं।
दुआ के साथ पति-पत्नी को आपसी रज़ामंदी, सफाई, सम्मान, सही स्वास्थ्य और अल्लाह पर भरोसे का ध्यान रखना चाहिए। औलाद अल्लाह की नेमत है और वह अपने सही समय तथा हिकमत के अनुसार देता है।